Monday, September 24, 2018

दुनिया की ये पांच ख़तरनाक जासूस महिलाएं

नाओमी को 3 साल बाद पता चला कि आख़िर हुआ क्या था.
"मैं एक बहुत अच्छे मनोचिकित्सक से मिली और जो कुछ हुआ था, उन्हें सब बताया. मेरी ज़िंदगी की लगभग पूरी कहानी. उन्होंने काफ़ी रिसर्च किया, अपने सहयोगियों से बात की और सभी इस बात पर सहमत हुए कि मुझे डिसोसिएटिव एमनिज़िया था."
यह एक दुर्लभ प्रकार का एमनिज़िया है. उनकी याददाश्त नहीं खोई थी लेकिन गंभीर तनाव के कारण उनके दिमाग़ पर झटका लगा था.
बीमारी का पता लगने पर उन्हें थोड़ी राहत महसूस हुई.
अपनी बीमारी को लेकर नाओमी ने 'द फ़ॉरगॉटन गर्ल' नाम की एक किताब भी लिखी है.
जासूसी ड्रामा आमतौर पर ऐसे होते हैं जिसे देखने पर इंसान अंदर तक हिल जाता है. अगर इसे लिखने वाली फ़ोबे वालर-ब्रिज हों तो इसमें भी डार्क कॉमेडी का तड़का मिल जाता है.
यही कारण है कि फ़ोबे का नया ड्रामा 'किलिंग ईव' ख़ुद में एक जासूसी कहानी और सिटकॉम (सिचुएशनल कॉमेडी) को समेटे हुए है.
जासूसी कहानियों में किसी महिला का ख़ूनी होना हमेशा ही आकर्षित करता है. इसका सबसे बड़ा कारण है कि महिलाओं का इस तरह के किरदार में कम देखा जाना और जो सामान्य नहीं होता वो हमेशा आकर्षित करता है.
ये तो हो गई काल्पनिक कहानियों की बात, लेकिन ऐसी ही कुछ महिलाओं की कहानी जो अपनी असल ज़िंदगी में एक ख़तरनाक जासूस रहीं और उनका जीवन हैरान करने वाली कहानियों से भरा रहा.
मार्गेथा गीरत्रुइदा मैकलियोड जिसे 'माता हारी' के नाम से जाना जाता है. माता हारी एक कामुक नृत्यांगना थीं, जिसे प्रथम विश्व युद्ध में जासूसी करने के आरोप में गोली मार दी गई. माता हारी की ज़िंदगी पर साल 1931 में हॉलीवुड फ़िल्म बनी जिसमें ग्रेटा गर्बो मुख्य भूमिका में थीं.
मार्गेथा का जन्म हॉलैंड में हुआ था और शादी एक फ़ौजी कैप्टन से. एक बुरे रिश्ते में फंसी मार्गेथा ने अपने नवजात बच्चे को भी खो दिया.
साल 1905 मार्गेथा ने खुद को 'माता हारी' की पहचान दी और इटली के मिलान स्थित ला स्काला और पेरिस के ओपेरा में एक कामुक नृत्यांगना बनकर उभरीं.
अब मार्गेथा खो चुकी थीं और जो दुनिया में जो थी उसे लोग माता हारी के नाम से जानते थे. अपने पेशे के कारण उनके लिए सफ़र करना आसान था.
इस कारण जर्मनी ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान माता हारी को पैसे के बदले जानकारियां साझा करने का प्रस्ताव दिया और इस तरह वह जर्मनी की जासूस बनीं.
माता हारी ने ख़ुद तो किसी को नहीं मारा, लेकिन उनकी जासूसी ने लगभग 50 हज़ार फ्रांसिसी सैनिकों को मौत के घाट उतारा.
इसके बाद फ़्रांस को उन पर शक़ होने लगा. फरवरी 1917 में उन्हें पेरिस से गिरफ्तार कर लिया गया और अक्टूबर में उन्हें गोली मार दी गई.
उनकी मौत के 100 साल बाद उनके अपराध पर बहस फिर शुरू हो गई. माता हरि को आज भी 'फेमिनिन सिडक्शन' और देश को धोखा देने वाले प्रतीक के रूप में देखा जाता है.
शॉर्लेट का पूरा नाम मैरी एन शार्लेट डी कॉर्डी था और वह फ़्रांस की क्रांति का हिस्सा रहीं. शॉर्लेट एक गिरोडिन थीं.
फ़्रांस की क्रांति में गिरोडिन वो हुए जो राजशाही तो ख़त्म करना चाहते हैं, लेकिन हिंसा के ख़िलाफ़ थे. लेकिन क्रांति के लिए हिंसा को ना अपनाने वाली शॉर्लेट ने अपने विपक्षी जैकोबिन समूह के नेता जीन पॉल मैराट की हत्या की.
जुलाई साल 1793 शार्लेट ने मैराट को उस वक्त चाकू मारा जब वो बाथटब में नहा रहे थे. जब उन्हें इस हत्या के जुर्म में गिरफ्तार किया गया तो शॉर्लेट ने इसे देश हित में की गई हत्या कहा. उन्होंने दावा किया कि इस एक हत्या से उन्होंने सैकड़ों-हज़ारों की जान बचाई है. लेकिन इसके चार दिन बाद ही उन्हें सज़ा मिली.
जासूस अपना उपनाम रखना पसंद करते हैं और इसी तथ्य को यथार्थ में बदलते हुए शी गुलान ने जासूसी की दुनिया में ख़ुद का नाम शी जिआनकिआओ रखा.
जिआनकिआओ अपने पिता की मौत का बदला लेने के लिए जासूस बनीं. इनकी हत्या चीन के नेता सुन चुआंगफांग ने 1925 में की थी.
10 साल बाद जिआनकिआओ ने चुआंगफांग के सिर में तब गोली मारी जब वह एक बौद्ध मंदिर में पूजा कर रहे थे. इस हत्या को अंजाम देने के बाद घटनास्थल से भागने के बजाय वह वहीं रुकी रही और अपना गुनाह कबूल किया.
इस हाई प्रोफाइल केस में 1936 में फ़ैसला आया और जिआनकिआओ को बरी कर दिया गया. इस केस में कोर्ट का कहना था कि ये हत्या अपने पिता की हत्या से आहत होकर की गई है. साल 1979 में शी जिआनकिआओ की मौत हुई.
एक वक़्त में जर्मनी की सबसे खूंखार महिला मानी जाने वाली ब्रिगित मोअनहॉप्ट रेड आर्मी फैक्शन की सदस्य रहीं. ब्रिगित 1977 में जर्मनी में एक आतंकी गतिविधि में शामिल रहीं.
70 के दशक में पश्चिम जर्मनी में एक वाम चरमपंथी समूह द्वारा एक के बाद एक कई हाईजैक, हत्याएं और बम धमाके किए गए. जहाज हाईजैक के साथ लगभग 30 लोगों की हत्या इस समूह ने की. ये अपराध पश्चिम जर्मनी में पूंजीवाद को खत्म करने के नाम पर किए गए.
1982 में इस अपराध में शामिल होने के कारण मोअनहॉप्ट को गिरफ्तार किया गया और पांच साल की सज़ा सुनाई गई. इसके अलावा उन्हें नौ अन्य हत्याओं के मामले में 15 साल की सज़ा दी गई.
मोअनहॉप्ट ने कभी अपना जुर्म कबूल नहीं किया और  में उन्हें परोल पर जेल से बाहर आने का मौका मिला. वह आज भी ज़िंदा हैं.
इइरायली इंटेलीजेंस एजेंसी मोसाद के लिए काम करने वाली एजेंट पेनेलोपे फ़लस्तीनी समूह ब्लैक सितंबर के नेता अली हुसैन सलामे की हत्या में शामिल रहीं.
अली हुसैन ने साल 1972 में म्यूनिख़ ओलिंपिक के दौरान 11 इसराइली खिलाड़ियों को बंधक बनाया और उनकी हत्या कर दी गई.
इस हत्या के जवाब में इइराइली प्रधानमंत्री गोल्डे मेरी के आदेश पर 'ऑपरेशन व्रैथ ऑफ गॉड' शुरू किया गया और इस ऑपरेशन को अंजाम देते हुए अली हुसैन सलामे की हत्या की गई.
अली हुसैन को मारने के लिए पेनेलोपे ने लगभग छह हफ़्ते का वक़्त उस अपार्टमेंट के पास बिताया जहां वह रहा रहते थे.
जिस बम धमाके में अली हुसैन सलामे की हत्या हुए उसमें पेनेलोपे भी मारी गईं. मौत के बाद उनके सामान से एक ब्रितानी पासपोर्ट बरामद हुआ जिसमें एरिका चैंबर नाम लिखा था.

Tuesday, September 11, 2018

丹麦对欧盟举措持信心

丹麦气候能源部部长表示,创造绿色就业机会的前景和减少对俄天然气依赖的驱动,都将会有利于说服欧盟在今年达成气候协议。康妮• 赫泽高部长对《路透社》表示,协议的达成将改善2009年哥本哈根全球气候协议前景。

"我确信会达成一个妥协方案",赫泽高在谈到欧盟付出的努力时说,"它可能不会很精彩,但我对它很有信心"。 赫泽高表示,欧盟领导人通过的一系列措施将改善后《京都议定书》全球气候协议前景,使温室气体排放量到2020年在1990年的基础上减少20%。明年丹麦首都举行的联合国气候变化大会将标志着全球协议的最终达成。

赫泽高在评论中强调,达不到欧盟协议规定意味着欧洲可能在在全球迈入新"绿色"职业的趋势中处于落后状态,可更新能源领域中的新"绿色"职业包括太阳能和风能。赫泽高还指出,很多对减排持谨慎态度的东欧国家将会从高效能源,减少使用排放温室气体的化石燃料,能源提供多样化中获益。

她表示,政府开始认识到"如果我们只保护昨天的工业而不为明天使我们致富的回应做出准备,将会对整个欧洲产生消极影响。
据《路透社》报道,由于支持本国小型汽车制造商,意大利已拒绝加入一项由法国,德国和英国签署的欧盟协议,以减少二氧化碳排放量来应对全球变暖。意大利在10月清楚表明,只有欧盟的规定满足该国的汽车规格,它才会支持这项欧盟整体计划。

该协议的条款中将涉及对未能符合新排放标准的汽车制造商予以严厉罚款,意大利表示这将损害其汽车产业。此协议对像菲亚特等小型汽车生产商制定比大型汽车更严格的标准, 意大利对此表示不满。

欧洲各国大使在至2015年前逐步实施排放限制上达成一致,这使其可与欧洲议会展开达成最后协议的谈判。有人担心,由于意大利拒绝接受对不符合标准的制造商予以重罚,这项由法国,德国和英国汽车制造国支持的协议 可能不能得以达成。

欧盟委员会把削减二氧化碳的汽车排放作为其更大气候目标的一部分,计划到2012年削减18%的二氧化碳汽车排放,即每公里降低至130克,并对违规者予以重罚。然而,意大利对该协议对小型汽车制定更严格的标准表示不满。比如说, 意大利菲亚特可能要削减至122克,而较大型的德国宝马将只需减少到137克。

据一文件草案表明,法国目前已提出了罚款分级制度,对那些只小范围未达标的汽车制造商施加较轻惩罚,以安抚意大利。 虽然意大利注意到这项举措是向“正确方向迈出的一步” ,但该协议在得到欧洲议会批准时仍然会面临困难,因为欧盟要求比会员国更大幅的二氧化碳削减。

Friday, September 7, 2018

肯尼亚公园或使用电网

据英国《卫报》报道,肯尼亚的主要国家公园正在考虑安设数千公里长的电网,并配以两倍的武装警力,以保护水源并阻止人们砍伐树木。肯尼亚野生动物保护局解释,这一举措的实施是由于气候变化以及其他因素的影响日益严重。

肯尼亚野生动物保护局是政府的准军事组织,负责管理该国的26个国家公园和其中的野生动物。局长朱利叶斯˙基普恩艾迪奇指出,近十年来肯尼亚的灾难数量上升了三倍。今年,干旱加上气候变化以及人口的快速增长共导致500多万人断粮。

朱利叶斯告诉《卫报》的记者:“这是第一次长久没雨,这对粮食安全、水资源短缺和能源问题有深远的影响。毫无疑问,未来10年肯尼亚将面临这三个危机。如果我们继续这样下去,20年后后果将会非常可怕。”

在肯尼亚的国家公园中,有五个除了是野生动物们的活动集中地之外,还负责提供全国近80%地区的饮用水和水力发电。但是其中一些已被擅自占地者侵入。 15年来,非法居住在Mau公园40万公顷森林密布区域的人们砍伐了将近10.4万公顷的树木。其他的公园则被放牧或木炭业侵占。

  国家公园作为肯尼亚最大的一片森林,对该地区以及邻国苏丹和乌干达的水源起着至关重要的作用。数百万人依靠这12条来自山区的河流维持生计, 这些河流为种植茶畜牧和能源工业供水。其他森林茂盛的公园为首都内罗毕和水力发电站提供水源。 灾区既包括历来潮湿的雨林区,也覆盖了常年干旱的沿海数州。气象学家认为造成连绵大雨的原因是于四月间活动频繁的大西洋天气系统,预测该种天气还将持续数周或更长时间。然而在大水淹没巴西北部的同时,南方部分地区却遭受着持续2个月的干旱。

灾民封堵新形成的河道或于其中堆积木筏。民防官员提到短吻鳄曾游经圣塔伦市区,同时巨蟒、响尾蛇和其他危险性爬行类动物也出没于很多区域的洪水中。

有数千人被洪水围困数日且缺少食物和清洁水源,同时会涌入城市和村镇避难,官方对此表示担忧。一些收容所已挤满难民、宠物和牲畜,并缺少食品和医疗用品。在包括重灾区尼昂市在内的一些地方,由于当地没有人员分配救济品,援助工作被迫搁置。

在大西洋海岸城市尼昂,洪水水位每天依然会上涨可达30厘米。洪水冲垮桥梁,不利于救援工作者在某些河道使用船只。该国许多道路已被切断,在一些偏远区域飞机已无法降落。

एलजीबीटी की पहचान सतरंगे झंडे की कहानी क्या है

र्वोच्च अदालत ने जैसे ही समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से हटाया, हर ओर इन्द्रधनुषी रंगों वाला झंडा शान से लहराने लगा.
ये रेनबो फ़्लैग एलजीबीटी समुदाय की पहचान है. दुनियाभर के समलैंगिक लोग अपनी एकजुटता दिखाने के लिए इन रंगों को लहराते दिख जाते हैं.
मानवाधिकार कार्यकर्ता पीटर टैटचल ने कहा, "मुझे नहीं लगता कि विश्व में किसी भी दूसरे प्रतीक को ऐसी मान्यता मिली है."
इस रेनबो फ़्लैग को 1978 में एलजीबीटी समुदाय के प्रतीक के रूप में मान्यता दी गई. सैन-फ्रांसिस्को के कलाकार गिलबर्ट बेकर ने आठ रंगों वाला डिज़ाइन पेश किया था. ये झंडा 25 जून को गे फ़्रीडम डे के दिन पहली बार फ़हराया गया था.
बेकर ने कहा था कि वो इसके ज़रिए विविधता को दिखाना चाहते थे और बताना चाहते थे कि उनकी सेक्शुएलिटी उनका मानवाधिकार है.
सैन-फ्रांसिस्को के बाद ये झंडा न्यूयॉर्क और लॉस एंजिल्स के खुले आसमान में फ़हराया गया. 1990 आते-आते ये झंडा दुनियाभर में एलजीबीटी समुदाय का प्रतीक बन गया.
सबसे पहले रेनबो फ़्लैग में आठ रंग जोड़े गए थे और हर रंग ज़िंदगी के एक अलहदा पक्ष को बयां करता था. इन रंगों का मतलब इस प्रकार है -
बाद में इन रंगों को घटाकर छह कर दिया गया. फ़िरोज़ी रंग की जगह नीले रंग ने ले ली, जबकि बैंगनी रंग को हटा दिया गया.
फ़्लैग इंस्टीट्यूट के ग्राहम बार्टम कहते हैं, " इस झंडे को इतना पसंद किए जाने का कारण इसकी सादगी है जो सबको साथ लेकर चलती है. ये ओलंपिक रिंग्स जैसा ही है, जिसे इस तरह से डिज़़ाइन किया गया है कि भाग लेने वाले सभी देशों के झंडे के रंग इसमें शामिल हो सकें"
बार्टम का कहना है कि अगर बेकर ने इस झंडे के साथ कुछ और बदलाव किए होते, जैसे की मेल सेक्शुएलिटी को दिखाने के लिए दो गोल आकार को एक तीर से जोड़ दिया होता तो शायद ये इतना प्रसिद्ध नहीं होता.
लेकिन इस डिज़ाइन को एक आज़ादी के प्रतीक की तरह स्वीकृति नहीं मिली है. जमाईका में गे सेक्स ग़ैरकानूनी है, वहां के अटॉर्नी जनरल ने ओरलैंडो शूटिंग के बाद अमरीकी दूतावास पर रेन्बो झंडा फहराए जाने को असभ्य बताया था.
रेन्बो झंडे का एक बड़ा इतिहास रहा है. 18वीं शताब्दी के क्रांतिकारी थॉमस पैने ने जंग के दौरान सुझाव दिया था कि जो जहाज़ जंग में नहीं हैं, उन्हें इस झंडे का इस्तेमाल करना चाहिए.
20वीं सदी की शुरुआत में शातिं का पैगाम देने वाले जेम्स विलियम वैन कर्क ने एक झंडा डिज़ाइन किया था जिसमें रेन्बो स्ट्रिप को ग्लोब से जोड़कर दिखाया गया था, मकसद ये दिखाना था कि कैसे अलग-अलग देश और रंग एक साथ मिलकर शांति से रह सकते हैं.
इंटरनेशनल कोऑपरेटिव अलायंस के झंडे पर भी ये रंग देखे जा सकते हैं.
बार्टम कहते हैं," रेन्बो हर उम्र के लोगों को आकर्षित करता है. हम सब को पता है कि ये वो समझ सकता है कि हमें क्या पसंद है. इसलिए ये काम करता है."
अगर आप सैन्य मामलों के बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं, तब भी शायद आपने वाटरलू की लड़ाई के बारे में सुना होगा.
यह इतिहास में सबसे मशहूर लड़ाइयों में से एक है. 19वीं सदी की शुरुआत में अधिकांश यूरोप को जीतने वाले फ्रांसीसी सम्राट नेपोलियन बोनापार्ट की हार हुई थी.
नेपोलियन को देश निकाला देकर एल्बा द्वीप पर भेजा गया था.  में नेपोलियन ने 70 हज़ार की फ़ौज के साथ नीदरलैंड्स पर हमला करने का फैसला किया.
वहां नेपोलियन को उखाड़ फेंकने का मंसूबा लिए एक गठबंधन तैयार खड़ा था.
उस वर्ष 18 जून को, नेपोलियन की सेना का सामना, ब्रिटिश, डच, बेल्जियम और जर्मन सेनाओं के गठबंधन से हुआ.
गठबंधन सेना की कमान वेलिंग्टन के ड्यूक और प्रशिया की सेना मार्शल गेभार्ड वॉन ब्लूचर के नेतृत्व में लड़ी थी.
वाटरलू की ये लड़ाई भारी बारिश में लगभग दस घंटे चली.
कई इतिहासकारों का मानना है कि बारिश और कीचड़ ने नेपोलियन की हार में भूमिका निभाई जिसने बाद के यूरोप का इतिहास बदल गया.
वे तर्क देते हैं कि महान फ्रांसीसी रणनीतिकार नेपोलियन ने अपनी भारी घुड़सवार सेना के इस्तेमाल में देरी की, क्योंकि ज़मीन बहुत गीली थी और इससे उनके प्रतिद्वंद्वियों को फ़ायदा मिला.
नेपोलियन की ऐतिहासिक हार के दो सौ साल बाद एक और थ्यौरी सामने आई है.
इसके मुताबिक़ नेपोलियन की हार के पीछे 1815 में यूरोप में गर्मियों के दौरान हुई बारिश के कारणों को माना गया है.
वाटरलू की लड़ाई से दो महीने पहले इंडोनेशिया में माउंट तंबोरा नाम के एक ज्वालामुखी में विस्फोट हुआ था.
ज्वालामुखी से निकलने वाली भारी राख ने लगभग एक लाख लोगों की जान ले ली.
लेकिन यूरोप में नेपोलियन की हार, और इंडोनेशिया में ज्वालामुखी फटने के बीच क्या संबंध है?
इंपीरियल कॉलेज लंदन के भूविज्ञानी मैथ्यू येंज की ओर से प्रकाशित एक अध्ययन के मुताबिक ज्वालामुखी की राख से आयनोस्फ़ेयर (वायुमंडल की ऊपरी तह) में "शॉर्ट सर्किट" बन गया. आयनोस्फ़ेयर में ही बादल बनते हैं.
इसकी वजह से यूरोप में भारी बारिश हुई. और इसी बारिश ने नेपोलियन की हार में योगदान दिया.
जर्नल जियोलॉजी में प्रकाशित मैथ्यू येंज के रिसर्च में ये भी बताया गया कि ज्वालामुखियों में होने वाला विस्फोट, विद्युतीकृत राख को इतनी ऊपर भेज सकता है, जितना पहले सोचा भी नहीं गया था.
मैथ्यू येंज बताते हैं, "जियोलॉजिस्ट पहले सोचते थे कि ज्वालामुखी की राख वायुमंडल की निचली परत में फंस जाती है क्योंकि ज्वालामुखी से उठा धुआं भी वहाँ तैरता है, हालांकि, मेरा शोध दिखाता है कि इलेक्ट्रिक फोर्स राख को ऊपरी वायुमंडल में भी भेज सकती है. कई प्रयोगों और कंप्यूटर के ज़रिए येंज ने साबित किया कि ज्वालामुखी के चार्ज कण, जो गोलाई में एक मीटर के 0.2 मिलियन से भी कम हैं, उन्हें बड़े विस्फोट से आयनोस्फ़ेयर में भेजा जा सकता है.
वहां वे आयनोस्फ़ेयर के इलेक्ट्रिक करंट में बाधा डालते हैं जिससे असामान्य बादल बनते हैं और बारिश होती है.
साल 1991 में फिलीपींस में माउंट पिनातुबू ज्वालामुखी के विस्फोट के बाद इसी प्रकार की गड़बड़ी दिखाई दी थी.
येंज अपनी खोज के ऐतिहासिक प्रभावों के बारे में कहते हैं, "लेस मिज़राबल उपन्यास में विक्टर ह्यूगो ने वाटरलू की लड़ाई के बारे में कहा है-असामान्य बादलों से भरा आकाश दुनिया के पतन के लिए काफ़ी था."
अगर वाकई एक ज्वालामुखी के फटने से नेपोलियन ने वाटरलू की जंग हारी होगी, तो ये इतिहास और मौसम के बीच संबंधों पर एक अनोखी खोज साबित हो सकती है.