इस बात पर आम सहमति है कि सरकारों को बुढ़ापे के टाइम बम को निष्क्रिय करने के लिए काम करना चाहिए और वे कोशिश कर भी रही हैं.
चीन ने 2015 में अपनी वन-चाइल्ड पॉलिसी की समीक्षा की और 2018 में संकेत दिया कि 2019 में वह जनसंख्या प्रतिबंधों को हटा लेगा.
सरकारी अखबार पीपुल्स डेली में छपे ऑप-एड के मुताबिक बच्चे को जन्म देना "पारिवारिक और राष्ट्रीय मुद्दा भी" है.
लेकिन पाबंदियों को आसान करने से भी शायद ही समस्या का समाधान हो. 2018 में चीन में 1 करोड़ 52 लाख बच्चों का जन्म हुआ जो पिछले 60 साल में सबसे कम है.
चीनी शिक्षाविद इसके पीछे प्रजनन कर सकने वाली महिलाओं की घटती तादाद और आर्थिक कारणों को जिम्मेदार मानते हैं.
आर्थिक वजहों से कई परिवार बच्चे पैदा करने की योजना टाल देते हैं. जिन परिवारों में महिलाएं ज़्यादा पढ़ी-लिखी हैं, वे मां की परंपरागत भूमिका निभाने को तैयार नहीं हैं.
जनसंख्या विशेषज्ञों का कहना है कि बूढ़ी होती आबादी के असर को कम करने में बुजुर्गों की सेहत को बढ़ावा देने वाली नीतियों की अहम भूमिका है.
सेहतमंद व्यक्ति लंबे वक़्त तक और अधिक ऊर्जा के साथ काम करने में सक्षम होते हैं. इससे स्वास्थ्य सेवाओं की लागत घट सकती है.
एक क्षेत्र जिसे अनदेखा किया गया है वह है काम करने वाले लोगों की विविधता, ख़ास तौर पर लैंगिक विविधता.
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के मुताबिक 2018 में महिलाओं के लिए वैश्विक श्रम बाज़ार में भागीदारी की दर 48.5 फीसदी थी जो पुरुषों से 25 फीसदी कम रही.
आईएलओ के अर्थशास्त्री एक्कहार्ड अर्न्स्ट कहते हैं, "जिन अर्थव्यवस्थाओं में महिला श्रम शक्ति की भागीदारी ज़्यादा रहती है वहां विकास दर में गिरावट कम आती है."
"महिला श्रमिक न सिर्फ़ अर्थव्यवस्था को प्रतिकूल झटकों से उबरने के काबिल बनाती हैं, बल्कि वे एक सशक्त गरीबी-निरोधी उपकरण का प्रतनिधित्व भी करती हैं."
चीन ने 2015 में अपनी वन-चाइल्ड पॉलिसी की समीक्षा की और 2018 में संकेत दिया कि 2019 में वह जनसंख्या प्रतिबंधों को हटा लेगा.
सरकारी अखबार पीपुल्स डेली में छपे ऑप-एड के मुताबिक बच्चे को जन्म देना "पारिवारिक और राष्ट्रीय मुद्दा भी" है.
लेकिन पाबंदियों को आसान करने से भी शायद ही समस्या का समाधान हो. 2018 में चीन में 1 करोड़ 52 लाख बच्चों का जन्म हुआ जो पिछले 60 साल में सबसे कम है.
चीनी शिक्षाविद इसके पीछे प्रजनन कर सकने वाली महिलाओं की घटती तादाद और आर्थिक कारणों को जिम्मेदार मानते हैं.
आर्थिक वजहों से कई परिवार बच्चे पैदा करने की योजना टाल देते हैं. जिन परिवारों में महिलाएं ज़्यादा पढ़ी-लिखी हैं, वे मां की परंपरागत भूमिका निभाने को तैयार नहीं हैं.
जनसंख्या विशेषज्ञों का कहना है कि बूढ़ी होती आबादी के असर को कम करने में बुजुर्गों की सेहत को बढ़ावा देने वाली नीतियों की अहम भूमिका है.
सेहतमंद व्यक्ति लंबे वक़्त तक और अधिक ऊर्जा के साथ काम करने में सक्षम होते हैं. इससे स्वास्थ्य सेवाओं की लागत घट सकती है.
एक क्षेत्र जिसे अनदेखा किया गया है वह है काम करने वाले लोगों की विविधता, ख़ास तौर पर लैंगिक विविधता.
अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के मुताबिक 2018 में महिलाओं के लिए वैश्विक श्रम बाज़ार में भागीदारी की दर 48.5 फीसदी थी जो पुरुषों से 25 फीसदी कम रही.
आईएलओ के अर्थशास्त्री एक्कहार्ड अर्न्स्ट कहते हैं, "जिन अर्थव्यवस्थाओं में महिला श्रम शक्ति की भागीदारी ज़्यादा रहती है वहां विकास दर में गिरावट कम आती है."
"महिला श्रमिक न सिर्फ़ अर्थव्यवस्था को प्रतिकूल झटकों से उबरने के काबिल बनाती हैं, बल्कि वे एक सशक्त गरीबी-निरोधी उपकरण का प्रतनिधित्व भी करती हैं."