Tuesday, October 2, 2018

पाकिस्तान की नींद उड़ाने वाली है रूस से मोदी सरकार का S- सौदा

भारत ने रूस में बने लंबी दूरी के एस-400 ट्रिम्फ़ एयर डिफेंस सिस्टम ख़रीदने की पूरी तैयारी कर ली है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन इसी हफ़्ते भारत पहुंच रहे हैं. कहा जा रहा है कि पुतिन के इसी दौरे में दोनों देश इस सौदे की घोषणा कर सकते हैं.
भारत का यह सौदा अमरीका से विवाद का कारण भी बन गया है. भारत और अमरीका के बीच हुए ''टू-प्लस-टू'' बैठक में रूस से इस सौदे की चर्चा केंद्र में रही थी.
अमरीका नहीं चाहता है कि भारत रूस से यह रक्षा सौदा करे. पिछले महीने 6 सितंबर को नई दिल्ली में ''टू-प्लस-टू'' बैठक में अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो और अमरीकी रक्षा मंत्री जिम मैटिस के साथ भारतीय विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण की बैठक हुई थी.
कहा जा रहा है कि इस सौदे के कारण अमरीका के आर्थिक प्रतिबंध का ख़तरा भारत पर मंडरा रहा है, लेकिन फिर भी भारत पांच एस-400 ख़रीदने के आख़िरी चरण में पहुंच गया है.
एस-400 को दुनिया के सबसे प्रभावी एयर डिफेंस सिस्टम माना जाता है. यह दुश्मनों के मिसाइल हमले को रोकने का काम करता है. कहा जा रहा है कि अगर भारत ने इस सौदे की घोषणा कर दी तो अमरीका के लिए यह बहुत निराशाजनक होगा.
उधर रूस की सरकारी समाचार एजेंसी स्पूतनिक का कहना है कि राष्ट्रपति पुतिन के भारत दौरे से पहले नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सुरक्षा पर बनी कैबिनेट कमेटी ने रूस से 5 अरब डॉलर से ज़्यादा के पांच एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की ख़रीद को मंजूरी दे दी है.
अमरीका ने 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में कथित रूसी हस्तक्षेप को ले
एनडीएए के मुताबिक़ रक्षा सौदा 1.5 करोड़ डॉलर से ज़्यादा का नहीं होना चाहिए. एस-400 ट्रिम्फ़ एनडीएए के दायरे से बाहर का सौदा है. एक अनुमान के मुताबिक़ इस सौदे की क़ीमत 5.5 अरब डॉलर से भी ज़्यादा की है जो कि अमरीकी सीमा 1.5 करोड़ डॉलर से बहुत ज़्यादा है.
1960 के दशक से ही रूस भारत का सबसे बड़ा रक्षा आपूर्तिकर्ता रहा है. स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट के अनुसार 2012 से 2016 के बीच भारत के कुल रक्षा आयात 68 फ़ीसदी रूस के साथ हुए हैं.
6 सिंतबर को नई दिल्ली में ''टू-प्लस-टू'' बैठक के बाद अमरीकी विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने पत्रकारों से कहा था कि इस बातचीत में अभी तक कोई सहमति नहीं बन पाई है. पॉम्पियो ने कहा था, ''हमलोग भारत और रूस के ऐतिहासिक संबंधों और विरासत को समझते हैं. ऐसे हम नियमों के हिसाब से काम करेंगे. इस पर हम भारत से बातचीत जारी रखेंगे.'' यह दोनों देशों का साझा बयान था और इसमें किसी भी तरह के रक्षा सौदे का ज़िक्र नहीं किया गया था.
भारत सालों से लंबी दूरी की हवाई सुरक्षा क्षमता को मजबूत करने के लिए एस-400 चाह रहा है. 2016 में भी रूस के साथ एस-400 ख़रीदने के लिए द्विपक्षीय वार्ता हुई थी. कहा जा रहा है कि जब चार और पांच अक्टूबर को रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे तो इस सौदे पर हस्ताक्षर हो जाएंगे. ये बात भी कही जा रही है कि भारत इस सौदे पर अमरीकी प्रतिबंधों को आड़े नहीं आने देना चाहता है.
कर रूस के ख़िलाफ़ अगस्त 2017 में काउंटरिंग अमरीकाज़ अडवर्सरीज थ्रु सैंक्शंस एक्ट (सीएएटीएसए) क़ानून पास किया था. इस क़ानून को अमरीका ने रूसी सरकार को सज़ा देने के लिए पास किया था. सीएएटीएसए जनवरी 2018 से प्रभावी हो गया है. भारत चाहता है अमरीका रूस के साथ उसके संबंधों में इस क़ानून से छूट दे.
अमरीका का यह क़ानून उन देशों को रोकता है जो रूस के साथ हथियारों का सौदा करते हैं. अमरीका ने हाल ही में यूएस नेशनल डिफेंस ऑथोराइजेशन एक्ट (एनडीएए) पास किया था, जो ट्रंप प्रशासन को उन देशों को सीएएटीएसए के तहत छूट देने का प्रावधान देता है जिनका रूस से रक्षा संबंध बहुत पुराना है
अभी तक यह साफ़ नहीं है कि भारत रूस से एस-400 कितनी संख्या में ख़रीदेगा. द डिप्लोमैट मैगज़ीन के सीनियर एडिटर फ्ऱैंज-स्टीफ़न गैडी का कहना है, ''रूसी सेना में एक एस-400 दो बटालियन के बीच बँटा रहता है. यह विभाजन दो बैटरियों के ज़रिए होता है.
एस-400 की एक बैटरी 12 ट्रांसपोर्टर इरेक्टर लॉन्चर्स से बनती है. कई बार चार और आठ से भी बनाई जाती है. सभी बैटरी में एक फ़ायर कंट्रोल रेडार सिस्टम भी निहित होता है. इसके साथ ही एक अतिरिक्त रेडार सिस्टम होता है और एक एक कमांड पोस्ट भी होता है.''
गैडी का कहना है, ''एस-400 में मिसाइल दागने की क्षमता पहले से ढाई गुना ज़्यादा तेज़ है. इसके साथ ही यह एक साथ 36 जगहों पर निशाना लगा सकता है. इसके अलावा इसमें स्टैंड-ऑफ जैमर एयरक्राफ़्ट, एयरबोर्न वॉर्निंग और कंट्रोल सिस्टम एयरक्राफ़्ट है. यह बैलिस्टिक और क्रूज़ दोनों मिसाइलों को बीच में ही नष्ट कर देगा.''
एस-400 रोड मोबाइल है और इसके बारे में कहा जाता है कि आदेश मिलते ही पांच से 10 मिनट के भीतर इसे तैनात किया जा सकता है. यही सारी ख़ूबियां एस-400 को पश्चिम में बने उच्चस्तरीय डिफेंस सिस्टम, जैसे- टर्मिनल हाई एल्टिट्यूड एरिया डिफेंस सिस्टम (टीएचएएडी) और एमआईएम-104 से अलग बनाती हैं.
.